25 स्वर्ग में मेरा और कौन है?
तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं,
परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग
और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
25 स्वर्ग में मेरा और कौन है?
तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं,
परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग
और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
25 स्वर्ग में आपके अतिरिक्त मेरा कौन है?
आपकी उपस्थिति में मुझे पृथ्वी की किसी भी वस्तु की कामना नहीं रह जाती.
26 यह संभव है कि मेरी देह मेरा साथ न दे और मेरा हृदय क्षीण हो जाए,
किंतु मेरा बल स्वयं परमेश्वर हैं;
वही मेरी निधि हैं.
25 स्वर्ग में मेरा और कौन है?
तुझे छोड़ मैं पृथ्वी पर कुछ
और नहीं चाहता।
26 चाहे मेरा शरीर और मन दोनों हार जाएँ,
फिर भी परमेश्वर सदा के लिए मेरे हृदय का बल
और मेरा भाग है।
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