12 हमारे बेटे जवानी के समय पौधों के समान बढ़े हुए हों144:12 हमारे बेटे जवानी के समय पौधों के समान बढ़े हुए हों: अर्थात् आरम्भिक जीवन ही में वे स्वस्थ, बलवन्त, जीवन्त, गठे हुए रहे हों।,
और हमारी बेटियाँ उन कोनेवाले खम्भों के समान हों, जो महल के लिये बनाए जाएँ;