4 मैं यहोवा के पास गया,
तब उसने मेरी सुन ली,
और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया,
और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
17 धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है,
और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है34:18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है: अर्थात् वह सुनने और सहायता करने को तत्पर रहता है। ,
और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो हैं,
परन्तु यहोवा उसको उन सबसे
मुक्त करता है। (नीति. 24:16, 2 तीमु. 3:11)