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स्तोत्र 34:4,6,17-19

OHSS Hindi Contemporary Version

4 मैंने याहवेह से प्रार्थना की और उन्होंने प्रत्युत्तर दिया;

उन्होंने मुझे सब प्रकार के भय से मुक्त किया.

6 इस दुःखी पुरुष ने सहायता के लिए पुकारा और याहवेह ने प्रत्युत्तर दिया;

उन्होंने उसे उसके समस्त संकटों से छुड़ा लिया है.

17 धर्मी की पुकार को याहवेह अवश्य सुनते हैं;

वह उन्हें उनके संकट से छुड़ाते हैं.

18 याहवेह टूटे हृदय के निकट होते हैं,

वह उन्हें छुड़ा लेते हैं, जो आत्मा में पीसे हुए है.

19 यह संभव है कि धर्मी पर अनेक-अनेक विपत्तियां आ पड़ें,

किंतु याहवेह उसे उन सभी से बचा लेते हैं;

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    4 मैंने यहोवा से विनती की,

    और उसने मुझे उत्तर दिया

    तथा मेरे सारे भय से मुझे मुक्‍त किया।

    6 इस दुःखी जन ने पुकारा,

    तब यहोवा ने उसकी सुन ली

    और उसके सारे कष्‍टों से उसे छुड़ा लिया।

    17 धर्मी पुकारते हैं और यहोवा सुनता है,

    और उन्हें उनकी सारी विपत्तियों से छुड़ाता है।

    18 यहोवा टूटे मनवालों के निकट रहता है,

    और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

    19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ आती तो हैं,

    परंतु यहोवा उसे उन सब से छुड़ाता है।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    4 मैं यहोवा के पास गया,

    तब उसने मेरी सुन ली,

    और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।

    6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया,

    और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।

    17 धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है,

    और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।

    18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है34:18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है: अर्थात् वह सुनने और सहायता करने को तत्पर रहता है। ,

    और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

    19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो हैं,

    परन्तु यहोवा उसको उन सबसे

    मुक्त करता है। (नीति. 24:16, 2 तीमु. 3:11)

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