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Salmos 101

खरवन िकल

ऊद भजन

1 ैं करऔर ा;

यहा, ैं भजन ा।

2 ैं ििपर चलूँा।

कब आएगा?

ैं अपनघर ें मन खरआचरण करूँा।

3 ैं अपनमन101:3 अक्षरशः अपनी आँखें ्‍टतपर नहीं लगा।

ैं अधरपर चलनों ों करतूँ,

ैं उनमें ूँा।

4 दय िलतझसरही,

ैं अनजरहूँा।

5 िपकर अपनपड़गलकरे,

उसैं करूँा;

िसकें चढ़ों

और िसकमन घमो,

उसैं सहूँा।

6 ें ि्‍सयों पर लगरहें

ि रहें;

िपर चलत

वहवक ा।

7 छल करनघर तर रह सका;

लनमनबनरहा।

8 रति ैं सब ्‍ों िकरूँा,

ि यहनगर सब अनरथकिों िूँ।

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