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Psalms 138

आभदय

ऊद भजन

1 ैं मन धनयवकरूँा;

वतमनैं भजन ा।

2 ैं पवििओर डवतकरूँा,

और करऔर सच्‍रण

धनयवकरूँा;

ोंि सब ों बढ़कर अपन

और अपनवचन महति138:2 या, क्योंकि तूने अपने वचन को अपने सब नाम से अधिक महत्त्व दिया है।

3 ििैंा,

ी;

बल कर हस बढ़ा।

4 यहा, सब धनयवकरेंे,

ोंि उनोंुँिकलवचनों ै।

5 यहों िषय ें े,

ोंि यहमहिबड़ै।

6 यदयपि यहमहै,

िवह नममनओर ्‍ि करतै;

परअहमनपहचनतै।

7 ैं कट कर ँ,

िरकिरखा;

शतिअपनबढ़एगा,

और िबचएगा।

8 यहिसब करा।

यहा, करसदै;

अपनों ों

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