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Salmos 144

थन

ऊद भजन

1 यहचटै, धनै।

वह ों लड़न

और करनिै।

2 वह िकरमय

और गढ़ ै,

वह चटऔर ै;

वह और शरणसै,

रजअधकर ै।

3 यहा, मन

ि उसकि ै?

मन

ि उसकिंकरतै?

4 मन्‍समै,

उसकिढलतसमैं।

5 यहा, अपनवरकर उतर ;

पहों

ि उनसिकले!

6 िजलचमककर शतितर-बितर कर े,

और अपनचलकर उनें कर े।

7 अपनबढ़ा;

महगर ें उब,

और परदिों े।

8 उनकुँछल ें िकलतैं,

और उनकिैं।

9 परम्‍वर, ैं िएक नया;

ैं दस रवबजकर भजन ा।

10 िजय िै,

और अपनऊद िशकतलवबचै।

11 बचा, और उन परदिों

िनकुँछल ें िकलतैं,

और उनकिैं।

12 हमअपनजवें िकसिों समों,

और हमिाँ महल तरगए ों समों।

13 हमखतहर रकउपज भररहें,

और हमड़-बकरिाँ हमों ें हज़ों-हज़बच्‍जनें।

14 हमहटे-कटों;

हमशहरपने,

हमें आई ें पड़े,

और हमों पर ा-टनो।

15 धन

वह रजऐसख-समि दशें ो!

धन

वह रजिसकपरम्‍वर यहै!

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