2 जब कुकर्मियों ने जो मेरे विरोधी और मेरे शत्रु थे,
मुझे खा डालने के लिए मुझ पर चढ़ाई की,
तो वे ठोकर खाकर गिर पड़े।
3 चाहे सेना मेरे विरुद्ध छावनी डाले,
फिर भी मेरा हृदय भयभीत न होगा।
चाहे मेरे विरुद्ध युद्ध भी छिड़ जाए,
फिर भी मैं आश्वस्त रहूँगा।
2 जब कुकर्मियों ने जो मेरे विरोधी और मेरे शत्रु थे,
मुझे खा डालने के लिए मुझ पर चढ़ाई की,
तो वे ठोकर खाकर गिर पड़े।
3 चाहे सेना मेरे विरुद्ध छावनी डाले,
फिर भी मेरा हृदय भयभीत न होगा।
चाहे मेरे विरुद्ध युद्ध भी छिड़ जाए,
फिर भी मैं आश्वस्त रहूँगा।
2 जब दुर्जन मुझे निगलने के लिए
मुझ पर आक्रमण करते हैं,
जब मेरे विरोधी तथा मेरे शत्रु मेरे विरुद्ध उठ खड़े होते हैं,
वे ठोकर खाकर गिर जाते हैं.
3 यदि एक सेना भी मुझे घेर ले,
तब भी मेरा हृदय भयभीत न होगा;
यदि मेरे विरुद्ध युद्ध भी छिड़ जाए,
तब भी मैं पूर्णतः निश्चिंत बना रहूंगा.
2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से
बैर रखते थे,
मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की,
तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले,
तो भी मैं न डरूँगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए,
उस दशा में भी मैं हियाव बाँधे निश्चित रहूँगा।
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