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Salmos 34

यहधरिों

ऊद भजनजब वह अबमनगल बना, और अबउसििा, और वह चलगया।

1 ैं हर समय यहधनकहूँा;

उसकि ितर रही।

2 यहपर गरकरा;

नमयह नकर आनिोंे।

3 यहरशकरो।

आओ, हम सब िलकर उसकि करें।

4 ैंयहिनती,

और उसनउततर ि

तथभय ्‍िा।

5 िोंउसकओर उनोंि ;

कभलज्‍िोंे।

6 इस ुःजन ा,

तब यहउसक

और उसककष्‍ों उसिा।

7 यहभय ननों ों ओर

उसकवनलकर उनें बचै।

8 परखकर34:8 या चखकर ि यहभलै!

धनवह मनउसकशरण ै।

9 यहपविो,

उसकभय ो,

ोंि उसकभय ननों घटनहीं ी।

10 जविंों घटै,

और रह ैं,

परयहिों

िभलवसघटी।

11 लको, आओ, ो,

ैं ें यहभय ननिा।

12 वह वन अभिरखत

और हति भले?

13 अपने,

और अपनोंों छल ें लनरख

14 रह, और भलकर

ांि और उसककर

15 यहें धरिों पर लगरहतैं

और उसकउनकओर लगरहतैं।

16 यहकरनों िरहत

ि उनकमरण पर िे।

17 धररतैं और यहनतै,

और उनें उनकिपतिों ै।

18 यहमनवों िकट रहतै,

और िउदकरतै।

19 धरपर बहिपतिाँ आतैं,

परयहउसउन सब ै।

20 वह उसकहडी-हडरककरतै,

और उनमें एक नहीं टती।

21 ्‍उस्‍टती,

और धरठहरेंे।

22 यहअपनों कर ै,

और उसकशरणगतों ें ठहरा।

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