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Salmos 40

धनयवबलि और सहयति
िशक िऊद भजन

1 ैं रज यहरतकरतरहा,

और उसनओर ककर ी।

2 उसनिगड्‌और दलदल ें िा,

और चटपर खड़करककदमों िै।

3 उसनुँें एक नयै,

हमपरम्‍वर ि ै।

बहयह खकर भयभोंे,

और यहपर भररखेंे।

4 धनवह मन

यहपर भररखतै,

और अभििों तथें रहनों ओर नहीं ा।

5 यहपरम्‍वर, आश्‍चरयकरऔर

िहमििैं,

बहैं;

नहीं।

यदि ैं उनकिषय ें बत

और उनकचरकरूँ इतनैं

ि उनकिनतनहीं सकती।

6 लबलि और अन्‍नबलि ी;

दकर ैं।

मबलि और पबलि ाँनहीं ी।

7 तब ैंकहा, ", ैं आयूँ!

तक ें िषय यहिै।

8 परम्‍वर,

ैं इचकरनरसन्‍ूँ।

यवसदय ें बसै।"

9 ैंबड़सभें िकत

भ-सै,

यहा, नत

ि ैंअपनुँनहीं रखा।

10 ैंिकत

अपनमन ें िनहीं रखा;

ैंसच्‍और उदचरै।

ैंकरऔर सच्‍

बड़सभिनहीं रखा।

11 यहा, अपनदयिकर;

करऔर सच्‍ितर रकरहे।

12 ोंि अनगििइयों िै;

अधरों ऐसपकड़ ि

ि ैं नहीं सकता।

िनतें िों कहीं बढ़कर ैं,

इसलिदय गयै।

13 यहा, करके!

यहा, सहयति!

14 वन करनें ैं,

सब लज्‍िऔर िों;

और ि रसन्‍ैं,

हटऔर अपमििँ।

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