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Salmos 42

सर

(भजन 4272)

परम्‍वर िहत

िशक िरहविों मश

1 हरिनदजल िाँफतै,

ी, परम्‍वर,

ैं िाँफतूँ।

2 ैं परम्‍वर ि, ाँ,

िपरम्‍वर िूँ।

ैं कब और परम्‍वर

दरशन करूँा?

3 िऔर आहरहैं,

और िभर झसकहतरहतैं,

"परम्‍वर कहाँ ै?"

4 इन ों मरण करक

मन भर

ि ैं धनयव

और जय जयक,

उतसव मन

यहभवन ें करता।

5 मन, िों ै?

तर तर ों ै?

परम्‍वर पर आशलगरह;

ैं उसकि करूँ

उदरकर

और परम्‍वर ै।

6 तर तर ै;

इसलिैं यरदन रदे,

हरिों और िसग

पहपर मरण करतूँ।

7 जल-धूँगर,

गर रतै।

तरों और लहरों

ाँिै।

8 ियहअपनकरिएगा,

और ैं उसका;

ैं उससथनकरूँवन परम्‍वर ै।

9 ैं परम्‍वर चटकहूँ:

"ों गया?

ैं शतरण

ों िकरतिूँ?"

10 शतिंकरतैं,

िससहडिाँ

र-चैं।

िभर झसकहतरहतैं,

"कहाँ परम्‍वर?"

11 मन, िों ै?

तर तर ों ै?

परम्‍वर पर आशलगरह;

ैं उसकि करूँ

उदरकरऔर परम्‍वर ै।

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