परमेश्वर हमारा शरणस्थान
1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,
संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
2 इसलिए हम नहीं डरेंगे,
चाहे पृथ्वी उलट जाए,
और पर्वत समुद्र के बीच जा गिरें;
3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए,
और उसके उमड़ने से पर्वत काँप उठें।
सेला।
1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,
संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
2 इसलिए हम नहीं डरेंगे,
चाहे पृथ्वी उलट जाए,
और पर्वत समुद्र के बीच जा गिरें;
3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए,
और उसके उमड़ने से पर्वत काँप उठें।
सेला।
1 परमेश्वर हमारे आश्रय-स्थल एवं शक्ति हैं,
संकट की स्थिति में सदैव उपलब्ध सहायक.
2 तब हम भयभीत न होंगे, चाहे पृथ्वी विस्थापित हो जाए,
चाहे पर्वत महासागर के गर्भ में जा पड़ें,
3 हां, तब भी जब समुद्र गरजना करते हुए फेन उठाने लगें
और पर्वत इस उत्तेजना के कारण थर्रा जाएं.
1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,
संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक46:1 संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक: यहाँ सहायक अर्थात्, सहयोग एवं सहकारिता। संकट: अर्थात् तनाव और दुःख देनेवाली सब परिस्थितियाँ। ।
2 इस कारण हमको कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी
उलट जाए,
और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएँ;
3 चाहे समुद्र गरजें और फेन उठाए,
और पहाड़ उसकी बाढ़ से काँप उठे। (सेला) (लूका 21:25, मत्ती 7:25)
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