1 ह परमशवर, त मर परमशवर ह,
म तझ यतन स ढढ़ग;
सख, उजड़ और नरजल भम पर मर परण तर पयस ह,
मर शरर तर अत अभलष ह।
2 इसलए मन पवतरसथन म तझ पर दषट क
क तर समरथय और तर महम क दख।
3 तर करण जवन स भ उततम ह;
मर हठ तर परशस करग।
4 इस परकर म जवन भर
तझ धनय कहत रहग;
और तर नम लकर अपन हथ उठऊग।
5 मर परण मन चरब और चकन भजन स तपत हग,
और मर मह जय जयकर करत हए तर सतत करग।
6 जब म बछन पर पड़ तर समरण करत ह,
त रत क हर एक पहर म तझ पर धयन करत ह।
7 कयक त मर सहयक ह,
इसलए म तर पख क छय म जय जयकर करग।
8 मर परण तझस लपट रहत ह;
तर दहन हथ मझ थम रहत ह।
9 परत ज मर परण क नषट करन क खज म ह,
व पथव क गहर सथन म ज पड़ग।
10 व तलवर स मर डल जएग,
और गदड़ क आहर ह जएग।
11 परत रज परमशवर म आनदत हग;
ज परमशवर क शपथ खत ह,
वह उललसत हग कयक झठ बलनवल क
मह बद कय जएग।