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Salmos 84

परम्‍वर भवन हत

िशक ििपर रहविों भजन

1 यहा,

िससितनमनहर ैं!

2 यहगनों अभिकरते-करत

िचलै;

तन और मन

िपरम्‍वर रहैं।

3 यहा,

और परम्‍वर,

िों ें अपनबस

और अबअपनबच्‍ों ि

ोंसलबनिै।

4 धनैं

भवन ें करतैं!

ितर ि करतरहतैं।

ा।

5 धन

वह मनझसमरै,

और िसकदय ें िपथ ैं!

6 जब 84:6 अक्षरशः बाका की घाटी कर ैं

उसों बनैं,

और वरउसआशिों

भरपकर ै।

7 बल पर बल ैं;

उनमें रतजन

िें परम्‍वर समउपसिा।

8 परम्‍वर यहा,

थन!

परम्‍वर, लगा!

ा।

9 परम्‍वर, हम, ,

और अपनअभिि्‍पर ्‍ि कर

10 गनों ें एक िि

कहीं और हज़िों उततम ै।

्‍ों ों ें करनअप

अपनपरम्‍वर भवन पर

खड़रहनअधििै।

11 ोंि यहपरम्‍वर और ै।

यहकरतऔर समै;

और खरचलतैं,

उनसवह अचवसनहीं रख ड़ता।

12 यहा!

धनवह मन

पर भररखतै!

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