3 जब मैं चुप रहा
तब दिन भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियाँ
पिघल गई।
4 क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा;
और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट
बनती गई। (सेला)
5 जब मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया
और अपना अधर्म न छिपाया,
और कहा, "मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूँगा;"
तब तूने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। (सेला) (1 यूह. 1:9)
8 मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे
चलना होगा उसमें तेरी अगुआई करूँगा;
मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा
और सम्मति दिया करूँगा।