3 जब मैं चुप रहा तो दिन भर कराहते-कराहते
मेरी हड्डियाँ पिघल गईं।
4 मैं दिन और रात तेरे भारी हाथ के नीचे दबा रहा।
मेरा बल मानो ग्रीष्मकाल के ताप से क्षीण हो गया। सेला।
5 मैंने तेरे सामने अपना पाप स्वीकार किया
और अपना अधर्म न छिपाया।
मैंने कहा, "मैं अपने अपराध यहोवा के सामने मान लूँगा,"
और तूने मेरे पाप के दोष को क्षमा कर दिया। सेला।
8 मैं तुझे बुद्धि दूँगा और जिस मार्ग पर तुझे चलना है
उस पर तेरी अगुवाई करूँगा;
मैं तुझ पर अपनी कृपादृष्टि रखते हुए तुझे सम्मति दूँगा।