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Salmos 35

िजय िथन

ऊद भजन

1 यहा, कददमलडैं,

उनककददमलड़;

झसकरतैं, उनसकर

2 और कर सहयतकरन

खड़ा ो।

3 बरींऔर करनों

मनआकर उनक;

और झसकह,

ि ैं उदूँ।

4 हक ैं

लजिऔर िदर ों!

ि कलपनकरतैं,

हटऔर उनकुँो!

5 उडसमों,

और यहउनें ाँकत!

6 उनकिऔर िसल35:6 उनकिऔर िसलो: "अनधकभरा" अरनहीं ि कहाँ ैं, उनें ि ी, उनकमनउसकउनें ो। ,

और यहउनकखद

7 ोंि अकरण उनोंिअपन

गडें िा;

अकरण उनों

िगडै।

8 अचनक उन पर िपति पड़े!

और उनोंि

उसें आप े;

और उसिपति ें आप पड़ें! (. 11:9,10, 1 ि. 5:3)

9 परनैं यहरण अपन

मन ें मगन ा,

ैं उसकिउदहरिा।

10 हडी-हडकहेंी,

"यहा, ै,

बड़े-बड़े बलवनों बचै,

और ों दरिों रककरतै?"

11 अधरखड़े ैं;

पर आरलगैं।

12 झसभलबदलकरतैं,

यहाँ तक ि ऊब ै।

13 जब तब ैं पहनरह35:13 ैं पहनरहा: कषों ें उनें गहरसहि िऔर अपमएविरतरण िा।,

और उपवकर करकुःउठरहा;

थनउततर नहीं िा। (अयू. 30:25, . 12:15)

14 ैं ऐसवनरखति

ैं; ि

िकरतो, ैं

पहरपहनिकर िा।

15 परनजब ैं गड़ालगतब

आननिकर इकट,

और िें ैं नत

िइकट; लगरहे;

16 आदर िरतैं;

पर ाँसतैं। (भज. 37:12)

17 रभु, कब तक खतरहा?

इस िपति े, िसमें उनों

़ा!

जविंों बचे!

18 ैं बड़ी सभें धनयवकरूँा;

बहों ैं ि करूँा।

19 लनशति

आननकरनँ,

अकरण ैं,

आपस ें ों इशकरनँ। (. 15:25, भज. 69:4)

20 ोंि ें नहीं लते,

परनें पचरहतैं,

उनकिछल कलपनकरतैं।

21 और उनोंिुँपसकहा;

"आहा, आहा, हमनअपनों ै!"

22 यहा, ै; रह!

रभु, झसरह!

23 उठ, ि,

परमवर, रभु,

कददमिपटि!

24 परमवर यहा,

अपनिकतअना;

और उनें िआननकरने!

25 मन ें कहनँ,

"आहा! हमइच!"

यह कहें, "हम उसिगल गए ैं।"

26 ि आननिैं

उनकुँलजएक ों!

िबड़ारतैं35:26 िबड़ारतैं: पर अपनबडपन िैं, ि िकर, करकिऊपर उठनहतैं।

वह लजऔर अनदर ँ!

27 धररसनरहतैं,

जयजयकऔर आननकरें,

और िरनतर करतरहें, यहबड़ाो,

अपनशल रसनै!

28 तब ुँधरचरी,

और िभर ि िकली।

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