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भजन संहिता 51:1-4,10,17

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

पाप क्षमा के लिये प्रार्थना

1 हे परमेश्वर, अपनी करुणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर;

अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे। (लूका 18:13, यशा. 43:25)

2 मुझे भली भाँति धोकर मेरा अधर्म दूर कर,

और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!

3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूँ,

और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।

4 मैंने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया,

और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है,

ताकि तू बोलने में धर्मी

और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। (लूका 15:18,21, रोम. 3:4)

10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर51:10 मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर: यह शब्द वास्तव में सृजन कार्य को दर्शाने के लिए प्रयोग किया गया है, अर्थात् किसी को जो नहीं है अस्तित्व में लाना।,

और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।

17 टूटा मन51:17 टूटा मन: अपराध बोध के बोझ के नीचे दबकर टूटा हुआ अन्त:करण। कहने का अर्थ है कि आत्मा पर इतना अधिक बोझ हो गया कि वह कुचल गई और दब गई। परमेश्वर के योग्य बलिदान है;

हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को

तुच्छ नहीं जानता।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    1 परमेश्वर, अपने करुणा-प्रेम51:1 करुणा-प्रेम मूल में ख़ेसेद इस हिब्री शब्द के अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये सब शामिल हैं में,

    अपनी बड़ी करुणा में;

    मुझ पर दया कीजिए,

    मेरे अपराधों को मिटा दीजिए.

    2 मेरे समस्त अधर्म को धो दीजिए

    और मुझे मेरे पाप से शुद्ध कर दीजिए.

    3 मैंने अपने अपराध पहचान लिए हैं,

    और मेरा पाप मेरे दृष्टि पर छाया रहता है.

    4 वस्तुतः मैंने आपके, मात्र आपके विरुद्ध ही पाप किया है,

    मैंने ठीक वही किया है, जो आपकी दृष्टि में बुरा है;

    तब जब आप अपने न्याय के अनुरूप दंड देते हैं,

    यह हर दृष्टि से न्याय संगत एवं उपयुक्त है.

    10 परमेश्वर, मुझमें एक शुद्ध हृदय को उत्पन्‍न कीजिए,

    और मेरे अंदर में सुदृढ़ आत्मा की पुनःस्थापना कीजिए.

    17 टूटी आत्मा ही परमेश्वर को स्वीकार्य योग्य बलि है;

    टूटे और पछताये हृदय से,

    हे परमेश्वर, आप घृणा नहीं करते हैं.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    1 हे परमेश्‍वर, अपनी करुणा के अनुसार

    मुझ पर अनुग्रह कर;

    अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।

    2 मुझे मेरे अधर्म से पूरी रीति से साफ़ कर,

    और मेरे पाप से मुझे शुद्ध कर।

    3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूँ,

    और मेरा पाप निरंतर मेरे सामने रहता है।

    4 मैंने तेरे ही विरुद्ध पाप किया है,

    और वह किया है जो तेरी दृष्‍टि में बुरा है;

    इसलिए जब तू निर्णय सुनाए तो धर्मी,

    और न्याय करे तो सच्‍चा ठहरे।

    10 हे परमेश्‍वर, मुझमें शुद्ध मन उत्पन्‍न‍ कर,

    और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नए सिरे से उत्पन्‍न‍ कर।

    17 टूटा मन परमेश्‍वर के योग्य बलिदान है;

    हे परमेश्‍वर, तू टूटे और पिसे हुए

    हृदय को तुच्छ नहीं जानता।

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