2 वह ज खरई स चलत और धरमकत क करय करत,
और हदय स सच बलत ह।
3 वह अपन जभ स नद नह करत
और न अपन पड़स क बरई करत ह,
और न ह अपन मतर क बदनम करत ह।
4 उसक दषट म नकमम मनषय तचछ जन जत ह,
परत वह यहव क भय मननवल क आदर करत ह,
और शपथ खकर बदलत नह चह हन उठन पड़;
5 वह अपन रपय बयज पर नह दत
और न नरदष क हन पहचन क लए घस लत ह।
ज कई ऐस चल चलत ह वह कभ नह डगमगएग।