2 परंतु मेरे पैर तो लड़खड़ाने पर थे;
मेरे कदम फिसलने पर थे।
3 क्योंकि जब मैंने दुष्टों को फलते-फूलते देखा,
तो उन घमंडियों के प्रति
ईर्ष्या से भर उठा।
16 जब मैंने सोचा कि इसे कैसे समझूँ,
तो यह मेरी दृष्टि में
तब तक कठिन समस्या बनी रही,
17 जब तक कि मैंने परमेश्वर के
पवित्रस्थान में जाकर
उन लोगों के परिणाम को न समझ लिया।