11 परंतु जो तेरी शरण लेते हैं वे सब मगन हों।
वे सदैव आनंद के गीत गाते रहें,
क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है;
और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं वे तुझमें प्रफुल्लित हों।
12 हे यहोवा, तू धर्मी मनुष्य को आशिष देता है;
तू उसे अपनी अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहता है।