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Salmos 10

िथन

1 यहा, ों खड़रहतै?

कट समय ों िरहतै?

2 ्‍अपनअहें ों पड़ ैं।

अपनबन्‍िों ें ँ।

3 ्‍अपनमन अभिपर घमकरतै,

और मनयह

और उसकिरसकरतै।

4 ्‍अपनअभिरण परम्‍वर नहीं जता;

वह चति परम्‍वर नहीं।

5 वह अपनों ें हर समय सफल ै;

िइतनैं

ि उसक्‍ि वहाँ तक नहीं पहुँचती।

वह अपनसब ििों पर ुँरतै।

6 वह अपनमन ें कहतै,

"ैं कभटलूँ:

तक पर िपति पड़ी।"

7 उसकुँऔर छल और ्‍टतभरै,

उसकपर उतऔर ैं।

8 वह ाँों ें लगरहतै,

और ्‍ों ें िहतकरतै।

उसकें असहमनें लगरहतैं।

9 िंें लगरहतै,

वह िपकर असहपकड़निलगरहतै;

और जब असहमनउसकें ै,

वह उसपकड़ ै।

10 तब वह असहमनदबकर ै,

और उसकबलवों चलै।

11 ्‍अपनमन ें कहतै,

"परम्‍वर गयै,

उसनअपनुँिरखै;

वह कभनहीं ा।"

12 उठ, यहा! परम्‍वर, अपनबढ़ा,

और असहमनों

13 ्‍यक्‍ि परम्‍वर ों नतै?

वह अपनमन ें कहतै,

"नहीं ा।"

14 िै,

और उनकऔर अतखत

ि उसकपलटअपनों े।

असहमनवय

ों ें ौंपतै।

अनों सहयक ै।

15 ्‍और करनों

उसक्‍टतूँढ़कर िि रह

16 यहिै।

उसकें ि-ि नष्‍गए ैं।

17 यहा, नमों इचै;

उनकमन करऔर अपनउनकओर लगएगा,

18 ि अनऔर चलकरे,

ि िरचगयमन

िकभभय रण बने।

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