16 तूह त मेरै ज़ल्म हणैं का आजी मुंह बझ़दै भाल़अ लागअ द।
मेरै ज़ल्म हणैं का आजी थिऐ तंऐं
मेरी ज़िन्दगीए हर धैल़ै
आपणीं कताबा दी लिखी हेरै दै डाही।
16 तूह त मेरै ज़ल्म हणैं का आजी मुंह बझ़दै भाल़अ लागअ द।
मेरै ज़ल्म हणैं का आजी थिऐ तंऐं
मेरी ज़िन्दगीए हर धैल़ै
आपणीं कताबा दी लिखी हेरै दै डाही।