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भज़न 61

आपणीं अरज

़ै-़ै आल़ेैं आल़ै ़ै ़ै भज

1 परमशर, पक,

िअरज़, !

2 िं ऐबआशझदी,

ुंांआपणैं रहर-पकमज

बशुंबडि़ू ़ेुंशरण लई सके।

3 शरण लणें ़ैआस,

शमणबचउछटअ आस

4 ुंआपणीं पबि़ैै-ीं रहणैं,

ुंआपणैं ैंशरण लणैं।

5 परमशर ीं नता,

नअ िहअ फल ़ुंडररहणैं आल़ै ा।

6 ़े अमर ़ी ,

सह ़ी दर ़िदअ रहअ61:6 सदा तेऊए ई खिंबा का राज़अ

7 परमशर, ़ी सदआछसमहनि,

कर आपणीं अटल़ूअर सतकरऊए

8 खअ करनुंसद़ै-़ै,

़ुंनत मनसह करनुंी।

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