1 हे परमेशर, मेरी पकार शुण,
मंऐं किई ताह सेटा अरज़, तूह दै तेतो ज़बाब!
2 मुखा निं ऐबै आशा ई शुझदी,
हुंह मांगा ताखा आपणैं देशा का दूर रही लेर-पकार पाई मज़त।
तूह बशैल़ मुंह तैहा बडी टोल्हा पिछ़ू ज़ेथ हुंह शरण लई सके।
3 मेरी शरण लणें ज़ैगा आसा तूह ई,
मेरै दुशमणा का बच़णा लै उछ़टअ कोट बी आसा तूह ई।
4 मुंह दै आपणीं पबित्र ज़ैगा जुगै-जुगै तैणीं रहणैं,
मुंह दै आपणैं फैंखा हेठै शरण लणैं।
5 हे परमेशर तंऐं शूणीं मेरी मानता,
तंऐं दैनअ मुल्है तिहअ फल ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहणैं आल़ै भेटा।
6 राज़े अमर लोल़ी खास्सी हुई,
सह लोल़ी पोस्ती दर पोस्ती ज़िऊंदअ रहअ।
7 हे परमेशर, तेऊ लोल़ी सदा तेरी आछी सम्हनै राज़ किअ,
तूह कर आपणीं अटल़ झ़ूरी अर सत्ता करै तेऊए फाज़त।
8 तेखअ करनी मुंह सदा तेरी ज़ै-ज़ैकार,
ज़ुंण मंऐं ताल्है मानत मनी सह बी करनी मुंह धैल़ पूरी।