बिधाता का मज़त मांगणा लै अरज़
1 खरीए पलका पाई मंऐं बिधाता सेटा पकार,
तेऊ शूणीं मेरी अरज़।
2 हे बिधाता, तूह डाह मुंह शल़ैघा घल़णै आल़ै अर
छ़ल़-कपट करनै आल़ै मणछा का बच़ाऊई।
3 ओ झ़ुठअ बोल़णैं आल़ै मणछो, बिधाता ताल्है किज़ै करनअ?
तम्हां लै तेऊ केतरी बडी सज़ा दैणीं?
4 तम्हैं बिन्हणै तिछै कतीरा करै,
संघा दहणैं आगीए नारे कूंडा दी।
5 तम्हां मांझ़ै बस्सणै का आसा मेशक देशे लोगा जैंदरी
अर कदार मुल्खे लोगा जैंदरी परदेसी ज़िहै बस्सणअ भलअ।
6 मुंह हुई तिन्नां मणछा संघै रहंदी खास्सी साला
ज़ुंण मेल़-ज़ोल़ा का नफरत करा।
7 हुंह, च़ाहा तिन्नां संघै मेल़-ज़ोल़ करनअ पर
तिंयां करा मेरै गल्ला करदी मुंह संघै झ़गल़अ।