1 हे बिधाता, हुंह मांगा ताखा मज़त,
हुंह पाआ ताह सेटा लेर-पकार।
2 हुंह खोज़ा आपणीं पठी खरी ताखा,
हुंह खोज़ा ताखा ई कि मुल्है किज़ै-किज़ै आफ़त आसा पल़ी दी।
3 ज़ेभै मुखा छ़ाड़ च़ाल्ली छ़ुटी,
तेभै हआ तिधी तूह ई मेरी मज़त करदअ।
ज़हा बाता हुंह डेऊई च़ाल्लअ त,
तेथ थिअ मेरै दुशमणै मुल्है खल़ाक्की डाही दी ढोही।
4 हुंह लागअ ओर्ही-पोर्ही भाल़अ,
पर मुखा निं तेथ कोहै शुझुअ,
ज़ुंण मुंह बच़ाऊई सके!
मुंह निं कुंण पुछ़णै आल़अ बी भेटअ।
5 हे बिधाता, मंऐं पाई ताह सेटा लेर-पकार कि तूह कर मेरी मज़त,
मुंह बच़ाऊंणै आल़अ आसा तूह ई,
आपणीं ज़िऊंदी ज़िता च़ाहा हुंह सिधअ ताह ई।
6 मेरी लेर-पकार शुण कि हुंह मांगा ताखा मज़त,
मेरी हुई ऐबै खास्सी बूरी दशा,
मुंह बच़ाऊ इना मेरै दुशमणा का!
किल्हैकि मुखा निं इना जोगी ज़ोर आथी।
7 एऊ कैद खानै का काढ मुंह पोर्ही,
तै करनी मुंह तेरै धर्मीं मणछे सभा दी तेरी ज़ै-ज़ैकार,
किल्हैकि तंऐं किई मुल्है खास्सी भलाई।