1 हे बिधाता, मुंह गांठणी तेरी झींण अर नसाफे गिहा,
मुंह बोल़णीं तेरी ई गिहा।
2 मुंह डाहणअ इहअ बभार ज़ेथ किछ़ै खोट निं होए,
ताह केभै एछणअ मुंह सेटा लै?
मुंह ज़िऊंणीं आपणैं घअरै शुची ज़िन्दगी।
3 बूरी गल्ला निं हुंह मंदअ ई आथी।
भ्रष्ट कामां करनै आल़ै का करा हुंह नफरत,
इना इहै कदुष्ट मणछा संघै निं मुंह बभार ई डाहणअ।
4 हुंह निं ताह नकदरै करदअ अर
नां बूराई संघै आपणअ नातअ डाहंदअ।
5 इहै मणछा का रहणअ मुंह दूर
ज़ुंण होरीए घैंचल़ करा,
नां मुंह इहै मणछ मनणै ज़ुंण
शरेरै अर घमंडी होए।
6 मुंह डाहणीं तिन्नां संघै संगत ज़ुंण बिधाता लै शुचै-पाक्कै होए,
तिन्नां दैणअ मुंह आपणीं ज़ैगा रहणैं।
आपणीं च़ाकरी करनै आल़ै बी डाहणैं मुंह तिंयां ई
ज़ुंण पठी मानदार होए।
7 मुंह निं आपणीं ज़ैगा छ़ल़-कपट करनै आल़ै मणछा रहणैं दैणअ,
ज़ुंण झ़ुठअ बोला, सह निं मुंह सेटा टेक्की सकदअ।
8 ज़ुंण मेरै देशै कदुष्ट होए,
तिंयां करनै मुंह धैल़ छ़ांटी करै बरैबाद करी,
बिधाते नगरी का करनै मुंह सोभै कदुष्ट खतम।