बिधाता का अरज़ कि झींण कर
हांढा लै गिह
1 हे बिधाता, परमेशर, हुंह लागा उझै स्वर्गा बाखा ताह भाल़अ,
ज़िधी राज़गाद्दी दी बेशी तूह राज़ करा।
2 ज़िहै दास अर हर बगत आपणैं मालका बाखा हेरै-भाल़ै रहा अर
दासी आपणीं मालका बाखा भाल़ी-हेरी रहा,
तिहै ई रहा हाम्हैं बी ताह भाल़ै लागी
कि तूह हाम्हां लै झींण करे।
3 हे बिधाता, हाम्हां लै कर झींण, ज़ीबाण झींण कर,
म्हारी किई लोगै साबा का बाधू बेइज़ती।
4 राज्ज़ी-मौज़ी रहणैं आल़ै सेठ मणछ हआ म्हारै सुहांगा लागै दै,
शरेरै मणछै लाऐ हाम्हैं खास्सै हंती।