1 ए म्हारै मालक, तूह आसा पोस्ती दर
पोस्ती लै म्हारअ आसरअ।
2 ज़धू तंऐं ईंयां बडी-बडी धारा बणाईं,
ज़धू तंऐं अह पृथूई अर सारअ संसार बणाअं,
इना सोभी का आजी बी थिअ तूह परमेशर ई,
अर आजू बी रहणअ सदा तूह ई।
3 तेरै एकी बैणा करै सका हाम्हैं मणछ भिई माट्टै जैंदरी बापस डेऊई
ज़िहै हाम्हैं तेता का बणाऐं दै आसा।
4 तेरै साबै हआ हज़ार साला बी एही,
ज़ेही कि एक धैल़ी-बिति होए!
ताल्है आसा सह राचकै एकी पहरा ज़िहअ।
5 तूह घर्होहल़ा हाम्हां दरैऊआ ज़िहअ,
हाम्हैं हआ सुपनै ज़िहै नच़ानक खतम।
हाम्हैं आसा इहै नरम घाह ज़िहै ज़ुंण
6 दोत्ती टिर्खिआ अर फूला
पर उडै जाआ सह मछैंईं।
7 हाम्हैं हुऐ तेरै रोश्शा करै बरैबाद,
हाम्हां आसा तेरै कोपा का काम्मणीं छ़ुटी दी।
8 ताखा आसा म्हारै पापो थोघ,
ज़ुंण काम हाम्हैं लुक्की करै बी किऐ, तिंयां बी आसा ताखा शुझदै लागै दै।
9 तेरै रोश्शा करै घटी म्हारी अमर,
हर धैल़ी बिता म्हारी ज़िहअ एकी बैणा ज़ेही।
10 हाम्हैं डाहा सत्तर साला ज़िऊंणें आशा,
ज़ै हाम्हां ज़ोर-ज़ाहण रहै दै होए, तै सका हाम्हैं अश्शी साला बी ज़िऊई।
पर तेथ बी पल़ा हाम्हां लै दुख अर आफ़ता ई,
म्हारी ज़िन्दगी जाआ झ़टपटै मुक्की संघा लागा अह संसार छ़ाडणअ।
11 तेरै रोश्शा दी केतरअ बल आसा, एतो थोघ निं कोही का आथी,
कुंण ज़ाणें कि तेरै कोपा किज़ै आफ़त पाणीं?
12 हाम्हां लै दै एही अक्ल कि ज़ुंण थोल़ी ज़ेही ज़िन्दगी हाम्हां का आसा,
सह लोल़ी ती हाम्हैं भली भांती काटी ज़ाणीं।
13 हे बिधाता, ऐबै निं भाल़अ लागै, म्हारी मज़त कर,
हाम्हां लै कर झींण, हाम्हैं आसा तेरै दास।
14 दोत्ती दै हाम्हां तेरी सदा रहणैं आल़ी झ़ूरी करै रज़ैऊई,
हाम्हां लोल़ी नाच़णै जोगी खुशी हुई अर सारी अमरा लोल़ी तेरी ज़ै-ज़ैकार करदै रहै।
15 ज़ेतरी साला हाम्हैं दुख अर आफ़ता ज़िरी,
तेतरी ई साला लोल़ी तै हाम्हैं खुश अर राज्ज़ी-मौज़ी रहै।
16 हाम्हैं आसा तेरै दास, हाम्हां लै दै तूह आपणैं महान कामां भाल़णेंओ मोक्कअ अर
तेरअ प्रतप्प लोल़ी म्हारै आद-लुआदा का शुझुअ।
17 ए म्हारै मालक, हाम्हां लै लोल़ी तेरी बर्गत हुई।
हाम्हां कर हर कामां दी सफल।