1 हे मेरै मालक, म्हारै बिधाता,
तेरअ महान नाओं प्रतप्प पुजअ सारै संसारै!
अर स्वर्गै भाल़ी सोभी तेरी ठाहठ।
2 लान्हैं-सुन्हैं आसा तेरी ज़ै-ज़ैकार करदै लागै दै,
इहअ करै निं तेरै दुशमणा अर
बरोधी का किछ़ै ज़बाब रहअ।
3 हुंह लागा तेरै हाथै बणाऐं दै सरगा भाल़अ अर
ज़ोथ अर तारै ज़ुंण तंऐं तेथ टकैल़ी आसा डाहै दै,
4 तै सोठा हुंह इहअ कि हाम्हैं मणछ किज़ै आसा कि ताह लागा म्हारै बारै सोठणअ?
हाम्हां मणछा बाखा किज़ू दैणअ ताह धैन?
5 तंऐं बणाअं मणछ आप्पू का धख ई होछ़अ,
तंऐं दैनअ तेऊ लै इज़त अर अदरो मुगट।
6 ज़ुंण आपणैं हाथै तंऐं संसार बणाअं, तंऐं बणाऐं तेते सैणैं मणछ ई,
अर सोभी ज़ीबा प्रैंदै राज़ दैनअ तंऐं तिन्नां ई लै।
7 डागै-चैणैं, सोभै बणें ज़ीब,
8 सरगै डैऊंदै च़ेल्लू-पखीरू,
समुंदरे म्हाछ़ली अर तेते सोभै ज़ीब।
9 बिधाता, तेरअ महान काम शुझिआ
पृथूई दी सारै इना सोभी गल्ला दी।