4 हे बिधाता, तूह रहैऊ मुखा आपणीं बात,
मुंह सखाऊ तेथ हांढणअ।
5 मुखा शखैल़ आपणैं सत्ता दी ज़िन्दगी ज़िऊंणीं,
मेरअ परमेशर आसा तूह ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ।
हुंह रहा सदा तेरै ई भरोस्सै।
8 किल्हैकि तूह बिधाता आसा धर्मीं अर झणैल़ू,
तूह खोज़ा पापी मणछा का कि किहअ लागा तेरी बाता हांढणअ।
9 भोल़ै मणछा का सखाऊआ तूह भलअ करनअ अर
इहअ कि तूह किज़ै च़ाहा।