23 ए बिधाते लोगो, तम्हैं झ़ूरा बिधाता लै! ज़ुंण शुचअ-पाक्कअ रहा, तेऊए फाज़त करा बिधाता। पर घमंडी लै दैआ सह पाक्कै दी सज़ा।
23 ए बिधाते लोगो, तम्हैं झ़ूरा बिधाता लै! ज़ुंण शुचअ-पाक्कअ रहा, तेऊए फाज़त करा बिधाता। पर घमंडी लै दैआ सह पाक्कै दी सज़ा।