1 कैसा धन्य है वह पुरुष
जो दुष्टों की सम्मति का आचरण नहीं करता,
न पापियों के मार्ग पर खड़ा रहता
और न ही उपहास करनेवालों की बैठक में बैठता है,
2 इसके विपरीत उसका उल्लास याहवेह की व्यवस्था का पालन करने में है,
उसी का मनन वह दिन-रात करता रहता है.
1 कैसा धन्य है वह पुरुष
जो दुष्टों की सम्मति का आचरण नहीं करता,
न पापियों के मार्ग पर खड़ा रहता
और न ही उपहास करनेवालों की बैठक में बैठता है,
2 इसके विपरीत उसका उल्लास याहवेह की व्यवस्था का पालन करने में है,
उसी का मनन वह दिन-रात करता रहता है.
1 क्या ही धन्य है वह मनुष्य,
जो दुष्टों की सम्मति पर नहीं चलता,
और न पापियों के मार्ग पर खड़ा होता,
और न ठट्ठा करनेवालों की बैठक में बैठता है।
2 परंतु वह तो यहोवा की
व्यवस्था से प्रसन्न रहता,
और उसकी व्यवस्था पर दिन
और रात मनन करता है।
1 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की योजना पर1:1 योजना पर: पाप करनेवालों की राय नहीं मानता है। वह उनके विचारों और सुझावों के अनुसार अपना जीवन नहीं जीता है। नहीं चलता,
और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता;
और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!
2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता;
और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता रहता है।
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