3 वह बहती जलधाराओं के तट पर लगाए गए उस वृक्ष के समान है,
जो उपयुक्त ऋतु में फल देता है
जिसकी पत्तियां कभी मुरझाती नहीं.
ऐसा पुरुष जो कुछ करता है उसमें सफल होता है.
3 वह बहती जलधाराओं के तट पर लगाए गए उस वृक्ष के समान है,
जो उपयुक्त ऋतु में फल देता है
जिसकी पत्तियां कभी मुरझाती नहीं.
ऐसा पुरुष जो कुछ करता है उसमें सफल होता है.