8 याहवेह करुणामय, कृपानिधान,
क्रोध में विलंबी तथा करुणा-प्रेम में समृद्ध हैं.
9 वह हम पर निरंतर आरोप नहीं लगाते रहेंगे,
और न ही हम पर उनकी अप्रसन्नता स्थायी बनी रहेगी;
10 उन्होंने हमें न तो हमारे अपराधों के लिए निर्धारित दंड दिया
और न ही उन्होंने हमारे अधर्मों का प्रतिफल हमें दिया है.
11 क्योंकि आकाश पृथ्वी से जितना ऊपर है,
उतना ही महान है उनका करुणा-प्रेम उनके श्रद्धालुओं के लिए.
12 पूर्व और पश्चिम के मध्य जितनी दूरी है,
उन्होंने हमारे अपराध हमसे उतने ही दूर कर दिए हैं.