1 याहवेह, आपने मुझे परखा है,
और जान लिया है.
2 मैं कब उठता हूं और मैं कब बैठता हूं, यह सब आपको ज्ञात रहता है;
दूरदर्शिता में आप मेरे विचारों को समझ लेते हैं.
3 आप मेरे आने जाने और विश्रान्ति का परीक्षण करते रहते हैं;
तथा मेरे समस्त आचार-व्यवहार से आप भली-भांति परिचित हैं.
4 इसके पूर्व कि कोई शब्द मेरी जीभ पर आए,
याहवेह, आप, उसे पूरी-पूरी रीति से जान लेते हैं.