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स्तोत्र 139:13-18

OHSS Hindi Contemporary Version

13 आपने ही मेरे आन्तरिक अंगों की रचना की;

मेरी माता के गर्भ में आपने मेरी देह की रचना की.

14 मैं आपके प्रति कृतज्ञ हूं, क्योंकि आपने मेरी रचना भयानक एवं अद्भुत ढंग से की है;

आश्चर्य हैं आपके कार्य,

मेरे प्राणों को इसका पूर्ण बोध है.

15 मेरा ढांचा उस समय आपके लिए रहस्य नहीं था

जब सभी अवस्था में मेरा निर्माण हो रहा था,

जब मैं पृथ्वी की गहराइयों में जटिल कौशल में तैयार किया जा रहा था.

16 आपकी दृष्टि मेरे विकासोन्मुख भ्रूण पर थी;

मेरे लिए निर्धारित समस्त दिनों का कुल लेखा आपके ग्रंथ में अंकित था,

जबकि वे उस समय अस्तित्व में भी न थे.

17 परमेश्वर, मेरे लिए निर्धारित आपकी योजनाएं कितनी अमूल्य हैं!

कितना विशाल है उनका कुल योग!

18 यदि मैं उनकी गणना प्रारंभ करूं,

तो वे धूल के कणों से भी अधिक होंगी.

जब मैं जागता हूं, आपको अपने निकट पाता हूं.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    13 तूने मेरे भीतरी अंगों को बनाया है,

    तूने मुझे माता के गर्भ में रचा है।

    14 मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ,

    क्योंकि मैं आश्‍चर्यजनक139:14 या भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूँ।

    तेरे कार्य अद्भुत हैं

    और मैं यह भली-भाँति जानता हूँ।

    15 जब मैं गुप्‍त में बनाया जाता,

    और पृथ्वी139:15 या माता के गर्भ में रचा जाता था,

    तब मेरी हड्डियाँ तुझसे छिपी न थीं,

    16 तेरी आँखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा।

    मेरे सब दिन तेरी पुस्तक में लिखे और निर्धारित किए गए थे,

    जबकि उनमें से एक भी अस्तित्व में न था।

    17 हे परमेश्‍वर, तेरे विचार मेरे लिए कितने बहुमूल्य हैं!

    उनकी संख्या का योग कैसा बड़ा है!

    18 यदि मैं उन्हें गिनूँ तो वे बालू के कणों से भी अधिक होंगे।

    जब मैं जाग उठता हूँ,

    तब भी तेरे साथ रहता हूँ।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    13 तूने मेरे अंदरूनी अंगों को बनाया है;

    तूने मुझे माता के गर्भ में रचा।

    14 मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, इसलिए कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया139:14 मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया: भयानक अर्थात् भयभीत करनेवाली बातें जिनसे भय या श्रद्धा उत्पन्न होती है। अद्भुत रीति से रचा गया: का वास्तविक अर्थ है, विशिष्ट: या पृथक:। हूँ।

    तेरे काम तो आश्चर्य के हैं,

    और मैं इसे भली भाँति जानता हूँ। (प्रका. 15:3)

    15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता,

    और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था,

    तब मेरी देह तुझ से छिपी न थीं।

    16 तेरी आँखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा;

    और मेरे सब अंग जो दिन-दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहले

    तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

    17 मेरे लिये तो हे परमेश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं!

    उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है!

    18 यदि मैं उनको गिनता तो वे रेतकणों से भी अधिक ठहरते।

    जब मैं जाग उठता हूँ, तब भी तेरे संग रहता हूँ।

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