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स्तोत्र 141

एक .

1 हव, ैं आपकरहूं, आइए;

जब ैं आपकूं, पर ि.

2 आपकमनथनधध;

तथउठा, बलि समरपण .

3 हव, पर पहरि;

ोंों कसि.

4 दय िअनओर ि,

ों ें िि,

ों गति बचइए;

उनकउतजन चखनबचइए.

5 िकरे, ैं इसें करूंा;

वह ांलग, यह िअभजन ै.

इसअसकरनिउपयनहीं,

िैं ितर ों ों िथनकरतरहूंा.

6 जब उनकरधों चटेंिएगतब उनें इस वकतवपर मरण आएगि वह यरा,

ि यह ितनांवनएवखदवकतवै:

7 "हल चलि टकर िखर ै,

हमहडिों अधपर िखरिएगा."

8 रभु, हव, ि आप पर लगै;

आप आशरय ैं, असरकि़िएगा.

9 उन फनों रकरदि, उनोंििैं,

उन फनों े, ों ििगए ैं.

10 जन अपनें ं,

और ैं रकििकल ं.

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