दावीद की रचना.
1 स्तुत्य हैं याहवेह, जो मेरी चट्टान हैं,
जो मेरी भुजाओं को युद्ध के लिए,
तथा मेरी उंगलियों को लड़ने के लिए प्रशिक्षित करते हैं.
1 स्तुत्य हैं याहवेह, जो मेरी चट्टान हैं,
जो मेरी भुजाओं को युद्ध के लिए,
तथा मेरी उंगलियों को लड़ने के लिए प्रशिक्षित करते हैं.