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स्तोत्र 30:5,11,12

OHSS Hindi Contemporary Version

5 क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप,

किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि;

यह संभव है रोना रात भर रहे,

किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.

11 आपने मेरे विलाप को उल्‍लास-नृत्य में बदल दिया;

आपने मेरे शोक-वस्त्र टाट उतारकर मुझे हर्ष का आवरण दे दिया,

12 कि मेरा हृदय सदा आपका गुणगान करता रहे और कभी चुप न रहे.

याहवेह, मेरे परमेश्वर, मैं सदा-सर्वदा आपके प्रति आभार व्यक्त करता रहूंगा.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    5 क्योंकि उसका क्रोध तो क्षण भर का होता है,

    पर उसकी कृपा जीवन भर की होती है।

    यद्यपि रात को रोना पड़े,

    परंतु भोर को आनंद होता है।

    11 तूने मेरे विलाप को नृत्य में बदल दिया है;

    तूने मेरा टाट उतारकर आनंद का कमरबंध बाँधा है,

    12 ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो।

    हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा,

    मैं सदा-सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूँगा।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    5 क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है,

    परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है30:5 उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है: उसकी प्रवृति में जीवन देना है। वह जीवन रक्षक है, वह शाश्‍वत जीवन देता है।।

    कदाचित् रात को रोना पड़े,

    परन्तु सवेरे आनन्द पहुँचेगा।

    11 तूने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला;

    तूने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द 30:11 तूने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द: जो मैंने पहना या मेरी कमर में कसा हुआ था वो दुःख का प्रतीक था और मेरे विलाप को दर्शाता है।

    का पटुका बाँधा है;

    12 ताकि मेरा मन तेरा भजन गाता रहे

    और कभी चुप न हो।

    हे मेरे परमेश्वर यहोवा,

    मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूँगा।

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