17 धर्मी की पुकार को याहवेह अवश्य सुनते हैं;
वह उन्हें उनके संकट से छुड़ाते हैं.
18 याहवेह टूटे हृदय के निकट होते हैं,
वह उन्हें छुड़ा लेते हैं, जो आत्मा में पीसे हुए है.
17 धर्मी की पुकार को याहवेह अवश्य सुनते हैं;
वह उन्हें उनके संकट से छुड़ाते हैं.
18 याहवेह टूटे हृदय के निकट होते हैं,
वह उन्हें छुड़ा लेते हैं, जो आत्मा में पीसे हुए है.
17 धर्मी पुकारते हैं और यहोवा सुनता है,
और उन्हें उनकी सारी विपत्तियों से छुड़ाता है।
18 यहोवा टूटे मनवालों के निकट रहता है,
और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
17 धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है,
और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है34:18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है: अर्थात् वह सुनने और सहायता करने को तत्पर रहता है। ,
और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
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