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Salmos 35

रचन

1 हव, आप उनसय-विकरें, झसय-विकर रहैं;

आप उनसकरें, झसकर रहैं.

2 और कवच ;

सहयतिइए.

3 उनकि, कर रहैं,

बरऔर उठइये.

यह आशसन ि,

"ैं ूं उद."

4 े, ों ैं,

लजिऔर अपमिों;

िजनबनरहैं,

परिखड़े ों.

5 जब हवउनककरे,

उस समं, िपवन उड़ा ै;

6 उनकऐस, िपर धकऔर िसलन ै.

और उस पर हवउनककरत.

7 उनोंअकरण िि

और अकरण उनोंिगडै,

8 उनकिउन पर अचनक पड़े,

उसें े, उनोंिा,

वयउस गडें िरकर नषं.

9 तब हवें उल्‍लसि

और उनकिगयउदहरिषय ा.

10 हडिां तक कह उठेंी,

"हव?

आप ैं ुःबलवे,

तथदरिऔर ों ़ाैं."

11 िउठ खड़े ैं;

झसउन िषयों छतकर रहैं, िनकनहीं ै.

12 उपकरतिफल अपकें रहैं,

ैं िकर रह गयूं.

13 जब ुःे, ैंसहि ें क-वसरण ि,

यहां तक ि ैंकर उपविा.

जब थनिउततर आईं,

14 ैं इस ें िकरतचलगय

ैं अपनिअथवििकर रहूं.

ैं ें ऐसगय

ैं अपनिकर रहूं.

15 िंयहां जब ैं कर कर िपड़ा ूं, एकतआनमनरहैं;

इसकि ैं समझ ा, पर आकरमण करनिएकजगए ैं.

लगिंकर रहैं.

16 जब िउपहकर रहे, उसमें रतसमा;

पर ांरहे.

17 हव, आप कब तक यह सब पचखतरहेंे?

उनकिशकबचि,

िंों समइन ों रकि.

18 महसभमनैं आपकआभयककरूंा;

जनसमें ैं आपकतवन करूंा.

19 अकरण शतबन गए ैं,

अब उनें उपहकरन्‍ो;

अब अकरण िबन गए

ों ों ों ें िंें िलजजतकरनअवसर ्‍ो.

20 उनकांि रक नहीं े,

ांि िगरिों ि

आरचनें लगरहतैं.

21 कर ियह कहतैं, "आहा! आहा!

हमनअपनों सब िै."

22 हव, सतआपकि ें ै; अब आप ांरहि.

हव, अब झसरहि.

23 रकिउठि!

परमवर और ी, पकें रसि.

24 हव, परमवर, अपनसचें िरमिि;

िि उनें आन्‍ो.

25 मन मन यह कह सकें, "ा, यहहम हते!"

अथवयह कह सकें, "हम उसिगल गए."

26 सभी, खद िि पर आनिरहैं,

लजिऔर िं;

सभी, िोंरमिकरन

वयिंऔर लजें दब ं.

27 सभी, खनमनकरतरहे,

आनें उल्‍लसिजय जयककरें;

उनकयह , "हवमहिा,

वह अपनवक कलें उल्‍लसिैं."

28 सरवदआपकिकतषणा,

तथआपकदनकरतरही.

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