7 कैसा अप्रतिम है आपका करुणा-प्रेम!
आपके पंखों की छाया में साधारण और विशिष्ट, सभी मनुष्य आश्रय लेते हैं.
7 कैसा अप्रतिम है आपका करुणा-प्रेम!
आपके पंखों की छाया में साधारण और विशिष्ट, सभी मनुष्य आश्रय लेते हैं.
7 हे परमेश्वर, तेरी करुणा कितनी अनमोल है!
मनुष्य की संतान तेरे पंखों की छाया में शरण लेती है।
7 हे परमेश्वर, तेरी करुणा कैसी अनमोल है!
मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं।
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