4 "याहवेह, मुझ पर मेरे जीवन का अंत प्रकट कर दीजिए.
मुझे बताइए कि कितने दिन शेष हैं मेरे जीवन के;
मुझ पर स्पष्ट कीजिए कि कितना है मेरा क्षणभंगुर जीवन.
5 आपने मेरी आयु क्षणिक मात्र ही निर्धारित की है;
आपकी तुलना में मेरी आयु के वर्ष नगण्य हैं.
वैसे भी मनुष्य का जीवन-श्वास मात्र ही होता है,
वह शक्तिशाली व्यक्ति का भी.
6 "एक छाया के समान, जो चलती-फिरती रहती है;
उसकी सारी भाग दौड़ निरर्थक ही होती है.
वह धन संचित करता जाता है, किंतु उसे यह ज्ञात ही नहीं होता, कि उसका उपभोग कौन करेगा.