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Salmos 56

िशक िे. "ांपर कबतरी" पर आधि. िकत रचना. यह उस घटनदरै, जब ें िििों पकडिा.

1 परमवर, पर ि,

ोंि शतचल रहैं;

िभर उनकआकरमण पर रबल रहै.

2 िंदक िकरतैं;

अनैं, पर अपनअहरहकर रहैं.

3 भयभिि ें, ैं आप पर भरकरूंा.

4 परमवर, आपकरतिि रशसनै,

परमवर, ैं आप पर भररखूंऔर णतिभय ा.

नशवर मनिा?

5 िभर वचन उलटकर रसििै;

ि िां चनउनकिनचरगई ै.

6 ि रचतैं, लगरहतैं,

हर कदम पर ि बनरखतैं,

ि कब सकें.

7 उनकटतखकर उनें बचकर ें;

परमवर, अपनइन ों िि.

8 आपनभटकनरखै;

आपनअपनें जमकर रखें ैं.

आपनइनकअपनतक ें रखै?

9 तब ैं आपकूंा,

शतिकर खड़े ोंे.

तब यह रमिएगि परमवर पकें ैं.

10 वहपरमवर, िनकरतिि रशसनै,

वहहव, िनकरतिि रशसनै.

11 ैं परमवर पर भररखूंा, तब िभय ा.

मनिसकतै?

12 परमवर, आपकरति गई मन्‍नतें करनैं;

ैं आपकअपनआभर-बलि अरपण करूंा.

13 ोंि आपनों रकै,

ांों आपनिसलनबचि

ैं, परमवर, आपक

वन ि ें चल सकूं.

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