5 तुम न तो रात्रि के आतंक से भयभीत होगे,
न ही दिन में छोड़े गए बाण से,
6 वैसे ही न उस महामारी से, जो अंधकार में छिपी रहती है,
अथवा उस विनाश से, जो दिन-दोपहरी में प्रहार करता है.
5 तुम न तो रात्रि के आतंक से भयभीत होगे,
न ही दिन में छोड़े गए बाण से,
6 वैसे ही न उस महामारी से, जो अंधकार में छिपी रहती है,
अथवा उस विनाश से, जो दिन-दोपहरी में प्रहार करता है.