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स्तोत्र 95

1 चलो, हम हवतवन ें आनदपवक ं;

अपनउदचटिउचवर ें मनरसकरें.

2 हम धनयवें उनकउपसिि ें आए

तवन ों ें हम मनरसकरें.

3 इसलिि हवमहपरमवर ैं,

समसवतऊपर सरैं.

4 गहरइयों पर उनकिरण ै,

परवत िखर उनकअधिें ैं.

5 समउनीं ै, ोंि यह उनीं रचनै,

ि उनीं हसतकि ै.

6 आओ, हम नतमसतक कर आरधनकरें,

हम हव, हमजनहमनटनें!

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