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स्तोत्र 96

1 हवि ें नय;

हर उनकगई ़ौषण.

2 हवि. उनकरशकरो;

रतिउनकसमि हवबचै.

3 ों ें उनकरतचर,

और उनकअदों षणहर जगह.

4 ोंि महैं हवऔर सरिैं ि े;

अनिि उनकरति सभवतअधिरदरख.

5 ोंि अनजनतसमसवतरतिैं,

िंवरडल बनहवैं.

6 भव और ऐशवरउनकों ओर ैं;

मरऔर महिउनकपविें बसैं.

7 ों समसो, हवपहचो,

हवपहचनकर उनकऔर मरो.

8 हवमहिकरो;

उनकउपसिि ें ेंकर ;

9 उनकदनपविरतऐशवरें .

उनकउपसिि ें ें पक.

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