6 तूह करा भोल़ै मणछे फाज़त,
ज़ेभै मुंह आफ़त पल़ी ती, तेभै बच़ाऊअ हुंह तंऐं ई।
7 हुंह बोला आपणैं दिलै हैअ डाह,
किल्हैकि बिधाता आसा मुल्है भलअ।
8 हे बिधाता, तंऐं बच़ाऊअ हुंह मरनै का,
तंऐं टुशै मेरी आछी का आशू अर
तंऐं निं मुल्है ठोहल़ दैनी लागणै।
9 मुंह रहणअ आपणीं ज़िऊंदी ज़िता,
ताह बाखा हांढदै लागी।