4 "हे बिधाता, ज़ीबाण, तूह डाह मुखा खोज़ी कि हुंह कधू तैणीं ज़िऊंणअ?
ऐबै मेरी आजू केतरी अमर रही?
मेरी मौत केभै हणीं?"
5 तंऐं भाल़ मुल्है केही धख ज़ेही अमर आसा दैनी दी!
ज़ुंण ज़िन्दगी हुंह ज़िऊआ, सह आसा ताल्है धख ज़ेही।
मणछे ज़िन्दगी आसा बागरीए एकी झ़लारै ज़ेही अर
6 उडदी छ़ैल्ली ज़ेही।
हाम्हैं हआ बृथा मैन्थ करदै लागै दै,
हाम्हैं डाहा ज़ैदात कठा करी,
पर इहअ थोघ निं हंदअ कि आजू अह कहा भेटणीं!